#कागजों में हरियाली, जमीन पर सन्नाटा! 22 हजार पौधों के रोपण पर उठे सवाल#


वन विभाग और विकास विभाग के आंकड़ों में भारी विरोधाभास, पौधारोपण अभियान की पारदर्शिता पर मंडराए संदेह

कादीपुर (सुलतानपुर)। विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए चलाए गए पौधारोपण अभियान की वास्तविकता पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। विकास क्षेत्र कादीपुर में पौधारोपण को लेकर वन विभाग और विकास विभाग के अधिकारियों के बयानों में बड़ा विरोधाभास सामने आया है, जिससे पूरे अभियान की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

जानकारी के अनुसार वन विभाग में तैनात वन दरोगा दीपक कनौजिया ने बताया कि 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गौरा बीबीपुर स्थित पौधशाला से विकास क्षेत्र कादीपुर के लिए कुल 22,050 पौधे निर्गत किए गए थे। विभागीय अभिलेखों में इन पौधों को संबंधित विभाग को हस्तांतरित कर दिए जाने का उल्लेख भी दर्ज है।

वहीं दूसरी ओर जब इस संबंध में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल फोन बंद मिला। इसके बाद एडीओ पंचायत से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि पर्यावरण दिवस पर केवल कुछ पौधे ही प्राप्त हुए थे, जिनकी संख्या दस-पांच के आसपास थी और उन्हें ब्लॉक परिसर में रोपित किया गया।

यहीं से पूरा मामला सवालों के घेरे में आ जाता है। यदि वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 22 हजार से अधिक पौधे विकास विभाग को उपलब्ध कराए गए, तो आखिर वे पौधे कहां लगाए गए? यदि लगाए गए हैं तो उनका स्थान, संख्या और निगरानी व्यवस्था क्या है? और यदि विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारी केवल कुछ पौधे मिलने की बात स्वीकार कर रहे हैं, तो विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज हजारों पौधों का हिसाब कौन देगा?

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बड़े पैमाने पर पौधारोपण के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद अधिकांश स्थानों पर लगाए गए पौधों का कोई अस्तित्व दिखाई नहीं देता। ऐसे में यह आशंका बलवती हो रही है कि कहीं पौधारोपण अभियान केवल कागजों तक सीमित तो नहीं है।

गौरतलब है कि जनपद में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों पौधे रोपित किए जाने का दावा किया जाता है। इसके लिए शासन स्तर से करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन यदि विभागों के आंकड़े ही एक-दूसरे से मेल नहीं खाते तो अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस बीच वन विभाग के उच्चाधिकारियों से भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। विभागीय सूत्रों के अनुसार नवागत रेंजर ने शनिवार को कार्यभार ग्रहण कर लिया है, लेकिन अभी कार्यालय में नियमित रूप से नहीं पहुंचे हैं। कार्यालय में मौजूद वन दरोगा दीपक कनौजिया ने केवल अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई।

अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यह स्पष्ट करे कि 22,050 पौधे वास्तव में कहां रोपित किए गए। यदि पौधारोपण हुआ है तो उसका भौतिक सत्यापन कराया जाए और यदि आंकड़ों में गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आखिर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर चल रहे अभियानों का उद्देश्य हरियाली बढ़ाना है या फिर केवल कागजों पर लक्ष्य पूरा दिखाना?

पड़ताल जारी है।