#उज्ज्वला लाभार्थियों को अब 4 सिलिंडर, सब्सिडी पर नया अपडेट#


गरीबी परिवारों को सब्सिडी पर एलपीजी कनेक्शन व सिलिंडर देने की सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाइ) के तहत अब साल में सिर्फ चार सिलिंडर ही मिलेंगे।

इस योजना के तहत देश में 10.60 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए गये हैं और अभी तक इनको साल में नौ सिलिंडर (300 रुपये प्रत्येक सिलिंडर पर सब्सिडी) पर दिये जाते थे।

सिर्फ चार सिलिंडर पर सब्सिडी

पिछले तीन महीने में एलपीजी सिलिंडर की कीमत में वृद्धि करने के बाद सरकार ने यह फैसला पश्चिम एशिया संकट की वजह से देश में एलपीजी की बढ़ती लागत और इसकी वजह से तेल मार्केटिंग कंपनियों पर बढ़ते बोझ को देखते हुए किया है।

सरकार का तर्क है कि अभी भी उज्ज्वला और गैर-उज्ज्वला एलपीजी ग्राहकों को 700 रुपये प्रति सिलिंडर की सब्सिडी मिल रही है, ऐसे में पेट्रोलियम सब्सिडी के समग्र तौर पर बढ़ते बोझ को देखते हुए यह फैसला किया गया है। यानी चार सिलिंडर 642 और बाकी के 942 रुपये पर मिलेंगे।पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की तरफ से होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने बताया कि, ‘उज्ज्वला ग्राहक औसतन साल में 4-5 सिलिंडर ही इस्तेमाल करते हैं, लिहाजा साल में सब्सिडी वाले सिलिंडर की संख्या घटाने पर भी कोई खास फर्क नहीं होगा।।’

प्रवीण खनूजा का कहना है कि 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलिंडर की कीमत तेल कंपनियों को 1600 रुपये की आ रही है जबकि उसे एक सामान्य ग्राहक को सिर्फ 942 रुपये (दिल्ली) में दिया जा रहा है।

साथ ही पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियों को इस समय पेट्रोल पर 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर की अंडररिकवरी हो रही है।

पिछले दो वित्त वर्षों के दौरान एलपीजी सब्सिडी के तौर पर ओएमसी को आम बजट से 52,000 करोड़ रुपये की मदद दी गई है।

मिडिल ईस्ट संकट को लेकर उठाया कदम

उज्ज्वला योजना की शुरुआत सरकार ने देश भर में एलपीजी जैसी स्वच्छ ईंधन पहुंचाने के लिए की थी। केंद्र सरकार ने आम गृहणियों को लकड़ी, उपले आदि जैसे खतरनाक ईंधन को हटा कर उसकी जगह एलपीजी (स्वच्छ ईंधन) का उपयोग बढ़े, इसके लिए सब्सिडी की शुरुआत की थी।

पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से देश में एलपीजी की आपूर्ति की समस्या बढ़ने से और एलपीजी की लागत बढ़ने के बाद सरकार को अपने हाथ खींचने पड़ रहे हैं।

देश के कई राज्यों में विभिन्न राजनीतिक दलों ने महिला वोटरों को लुभाने के लिए एलपीजी सब्सिडी देने का चुनावी वादा भी किया है।

बहरहाल, पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से भारत की तेल रिफाइनरियां एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता से ले रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष से पहले की तुलना में आज घरेलू रिफाइनरियां 60 फीसद ज्यादा एलपीजी का निर्माण कर रही हैं।

पिछले चार दिनों के दौरान औसतन 42 लाख एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग रोजाना हुई है जबकि आपूर्ति 44 लाख सिलिंडर की है। यह बताता है कि संघर्ष के शुरुआती दिनों के मुकाबले अब एलपीजी आपूर्ति की स्थिति काफी सुधर गई है।

होर्मुज जल मार्ग से भारत अभी तक अपनी जरूरत का 70 फीसद एलपीजी लेता रहा है लेकिन वह रूट बाधित है। अब ओमान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से एलपीजी ली जा रही है।