#Petrol-Diesel Price: नए साल में घटेंगे पेट्रोल डीजल के दाम, बड़ी कटौती की तैयारी में सरकार; जान लें जेब पर कितना पड़ेगा असर#

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देश की राजनीति में चुनावी रंग साफ दिखने लगा है। भाजपा ने हाल ही में संपन्न चार बड़े राज्यों में से तीन राज्यों में विजय हासिल कर ली है। इसके बावजूद विपक्ष की तरफ से महंगाई को मुद्दा बनाने की कोशिश जारी है। ऐसे में पेट्रोलियम सेक्टर में जो तस्वीर बन रही है, उससे ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि चुनावों से पहले देश में पेट्रोल व डीजल की कीमतों में कमी की जा सकती है।
दिसंबर में औसतन 77.14 डॉलर प्रति बैरल की दर से खरीद
वजह यह है कि दिसंबर, 2023 में भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से औसतन 77.14 डॉलर प्रति बैरल की दर से कच्चे तेल का आयात किया है। भारत की तरफ से आयातित यह पिछले छह महीने की सबसे कम कीमत है। इस पूरे वित्त वर्ष कच्चे तेल की कीमत सिर्फ दो महीने (सितंबर में 93.54 डॉलर और अक्टूबर में 90.08) ही कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा रही है, जबकि शेष सात महीनों में न्यूनतम 74.93 डॉलर प्रति बैरल और अधिकतम 83.76 डॉलर प्रति बैरल रही है।

भारत के लिए क्रूड की औसत आयात मूल्य (प्रति बैरल)
वर्ष 2023-24 (26 दिसंबर तक)- 77.14 डॉलर
वर्ष 2022-23- 93.15 डॉलर
वर्ष 2021-22-79.18 डालर
वर्ष 2020-21-44.82 डॉलर
वर्ष 2019-20-60.47 डॉलर
चालू वित्त वर्ष के दौरान आयात मूल्य (प्रति बैरल)
अप्रैल- 83.76 डॉलर
मई- 74.98 डॉलर
जून- 74.93 डॉलर
जुलाई- 80.37 डॉलर
अगस्त- 86.43 डॉलर
सितंबर- 93.54 डॉलर
अक्टूबर- 90.08 डॉलर
नवंबर- 83.46 डॉलर
दिसंबर- 77.14 डॉलर

खुदरा कीमतों में 22 मई, 2022 के बाद से कोई बदलाव नहीं
भारत दुनिया के प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में इकलौता देश है, जहां पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों में 22 मई, 2022 के बाद से कोई बदलाव नहीं हुआ है। तब केंद्र सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती की थी। नियमों के आधार पर अभी भी तेल कंपनियों को रोजाना इन उत्पादों की कीमतें तय करने का अधिकार है, लेकिन इन्होंने इस अधिकार का इस्तेमाल 06 अप्रैल, 2022 के बाद नहीं किया है।

इस दौरान भारत ने कच्चे तेल की खरीद अधिकतम 116 डॉलर (जून, 2022 की औसत कीमत) तक गई और न्यूनतम 74.93 (जून, 2023 की औसत आयात मूल्य) पर की, लेकिन खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया। अब जब आम चुनाव सर पर है तो सरकार के भीतर खुदरा कीमतों को घटाने को लेकर हलचल शुरू हुई है। इस बारे में पिछले दिनों पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने सरकारी क्षेत्र की तीनों प्रमुख पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों के साथ बैठक भी की है।

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पेट्रोलियम कंपनियों को 58,198 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ
खुदरा कीमत के घटने की जो तस्वीर बन रही है उसके पीछे एक प्रमुख वजह यह भी है कि सरकारी तेल कंपनियों की माली हालत काफी मजबूत बन कर उभरी है। चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में इंडियन आयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम व भारत पेट्रोलियम को संयुक्त तौर पर 58,198 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष (2022-23) की पहली छमाही में इन तीनों कंपनियों को 3,805.73 करोड़ रुपये का संयुक्त तौर पर घाटा हुआ था।

पिछले वर्ष इन कंपनियों को हुए घाटे की भरपाई के लिए केंद्र सरकार को बजट से आवंटन करना पड़ा था। तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर, 2023) में भी इन कंपनियों को जबरदस्त मुनाफे की संभावना है। ऐसे में सरकार पर इन कंपनियों की माली हालत को लेकर कोई दबाव नहीं है। बहरहाल, इस बारे में फैसला उच्च स्तर पर ही लिया जाएगा।