#आज से पितृपक्ष की हो गई शुरुआत#

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वाराणसी। आज से पितृपक्ष की हो गई शुरुआत। ऐसा माना जाता है कि प्रतिपक्ष में पुरखों का श्राद्ध और तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आपको व आपके परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हैं. जिससे आपके जीवन में आने वाली कठिनाइयां आपसे दूर रहें. हिंदू पंचांग के अनुसार पितृपक्ष कि आज से गई शुरुआत

आज से शुरू हो गया है श्राद्ध पक्ष जिसमें पूर्वजों व पितरों को श्रद्धा के माध्यम से तर्पण देकर प्रसन्न किया जाता है जिससे कि पुरखों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहे इस अवधि में ज्ञात व अज्ञात समस्त पुरखों को तर्पण दिया जाता है.
आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या पंद्रह दिन पितृपक्ष (पितृ = पिता) के नाम से विख्यात है। इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों (पूर्वजों) को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर पार्वण श्राद्ध करते हैं। पिता-माता आदि पारिवारिक मनुष्यों की मृत्यु के पश्चात्‌ उनकी तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले कर्म को पितृ श्राद्ध कहते हैं।
श्रद्धया इदं श्राद्धम्‌ (जो श्र्द्धा से किया जाय, वह श्राद्ध है।) भावार्थ है प्रेत और पित्त्तर के निमित्त, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक जो अर्पित किया जाए वह श्राद्ध है।
हिन्दू धर्म में माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता मानी गई हैं। जन्मदाता माता-पिता को मृत्यु-उपरांत लोग विस्मृत न कर दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष कहते हैं जिसमे हम अपने पूर्वजों की सेवा करते हैं।
श्राद्ध के दौरान कुल देवताओं, पितरों और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट की जाती है. वर्ष में पंद्रह दिन की विशेष अवधि में श्राद्ध कर्म किए जाते हैं और इसकी शुरुआत आज से हो चुकी है. श्राद्ध पक्ष को पितृपक्ष और महालय के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पृथ्वी पर सूक्ष्म रूप में आते हैं और उनके नाम से किए जाने वाले तर्पण को स्वीकार करते हैं. इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.कब होता है पितृपक्ष ?पितृपक्ष भाद्रपद की पूर्णिमा से ही शुरु होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलते हैं. आश्विन माह के कृष्ण पक्ष को ही पितृपक्ष कहा जाता है. भाद्रपद पूर्णिमा को उनका श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन वर्ष की किसी भी पूर्णिमा को हुआ हो. शास्त्रों में भाद्रपद पूर्णिमा के दिन देह त्यागने वालों का तर्पण आश्विन अमावस्या को करने की सलाह दी जाती है. वहीं वर्ष के किसी भी पक्ष में जिस तिथि को घर के पूर्वज का देहांत हुआ हो उनका श्राद्ध कर्म पितृपक्ष की उसी तिथि को करना चाहिए.
पितृपक्ष तिथियां

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पितृपक्ष 29 सितंबर यानी आज से शुरू हो चुके हैं. इसकी प्रतिपदा तिथि आज दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से लेकर 30 सितंबर यानी कल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगी.

अनुष्ठानों का विशेष समय

पितृ पक्ष का कुतुप मुहूर्त 29 सितंबर यानी आज दोपहर 11 बजकर 47 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. साथ ही रौहिणी मुहूर्त आज दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से दोपहर 1 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. अपराह्न काल आज दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 46 मिनट तक रहेगा.

श्राद्ध तिथियां
29 सितंबर 2023, शुक्रवार पूर्णिमा श्राद्ध

30 सितंबर 2023, शनिवार द्वितीया श्राद्ध

01 अक्टूबर 2023, रविवार तृतीया श्राद्ध

02 अक्टूबर 2023, सोमवार चतुर्थी श्राद्ध

03 अक्टूबर 2023, मंगलवार पंचमी श्राद्ध

04 अक्टूबर 2023, बुधवार षष्ठी श्राद्ध

05 अक्टूबर 2023, गुरुवार सप्तमी श्राद्ध

06 अक्टूबर 2023, शुक्रवार अष्टमी श्राद्ध

07 अक्टूबर 2023, शनिवार नवमी श्राद्ध

08 अक्टूबर 2023, रविवार दशमी श्राद्ध

09 अक्टूबर 2023, सोमवार एकादशी श्राद्ध

10 अक्टूबर 2023, मंगलवार मघा श्राद्ध

11 अक्टूबर 2023, बुधवार द्वादशी श्राद्ध

12 अक्टूबर 2023, गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध

13 अक्टूबर 2023, शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध

14 अक्टूबर 2023, शनिवार सर्व पितृ अमावस्या

पितृपक्ष में पित्रो को याद करने की विधि

पितृ पक्ष में हम अपने पितरों को नियमित रूप से जल अर्पित करें. यह जल दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके दोपहर के समय दिया जाता है. जल में काला तिल मिलाया जाता है और हाथ में कुश रखा जाता है. जिस दिन पूर्वज की देहांत की तिथि होती है, उस दिन…