#आजमगढ़ : निजामाबाद में परंपरागत ढंग से निकला सातवीं मुहर्रम का जुलूस।#


निजामाबाद (आजमगढ़)। ऐतिहासिक कस्बा निजामाबाद में बुधवार को सातवीं मुहर्रम का जुलूस परंपरागत एवं धार्मिक श्रद्धा के साथ निकाला गया। जुलूस काजी के इमामबाड़े से प्रारंभ होकर अपने कदीमी मार्गों से गुजरते हुए पूरे कस्बे का भ्रमण करता रहा। इस दौरान शिया समुदाय के लोगों ने विभिन्न स्थानों पर मजलिस आयोजित कर इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की तथा मातम किया।जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। मातमी दस्तों ने नौहाखानी और सीना-जनी कर कर्बला की याद को ताजा किया। जुलूस जब निजामाबाद थाना परिसर पहुंचा तो वहां भी मजलिस और मातम का आयोजन किया गया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर थाना परिसर सहित पूरे जुलूस मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी लगातार भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

भाजपा नेता एवं ऑल इंडिया शिया समुदाय के जिला अध्यक्ष सैयद सेराज आज़मी ने बताया कि निजामाबाद एक ऐतिहासिक कस्बा है, जहां सैकड़ों वर्षों से सातवीं मुहर्रम का जुलूस परंपरागत ढंग से निकाला जाता रहा है। उन्होंने कहा कि शिया समुदाय के लोग पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ अपने कदीमी रास्तों से जुलूस निकालते हुए मजलिस और मातम करते हैं तथा देर रात पुनः काजी के इमामबाड़े में पहुंचकर कार्यक्रम का समापन करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और न्याय के लिए संघर्ष का संदेश भी देता है। जुलूस के दौरान समुदाय के लोगों ने अमन, भाईचारे और देश की खुशहाली के लिए दुआएं भी मांगीं। सातवीं मुहर्रम के अवसर पर पूरे कस्बे में धार्मिक माहौल बना रहा। जुलूस मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की गई थीं। देर रात काजी के इमामबाड़े में अंतिम मजलिस और मातम के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जहां कर्बला के शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।