#वीरांगनाओं की गाथा से सजा सरस्वती शिशु मंदिर, बेटियों ने दिखाया मातृ शक्ति का दम#

बरेली

रिपोर्ट सुमित श्रीवास्तव
………………………..

वीरांगनाओं की गाथा से सजा सरस्वती शिशु मंदिर, बेटियों ने दिखाया मातृ शक्ति का दम

विद्या भारती द्वारा आयोजित “मातृ शक्ति संगम” कार्यक्रम का भव्य आयोजन रामानुज दयाल अग्रवाल सरस्वती शिशु मंदिर, रामपुर गार्डन बरेली में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसे मुख्य अतिथि श्रीमती प्रीति आर्या तथा मुख्य वक्ता प्रोफेसर नीलम गुप्ता ने संयुक्त रूप से सम्पन्न किया।

कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए श्रीमती प्रीति आर्या ने सप्त शक्ति संगम की सात स्त्री शक्तियों—कोमलता, करुणा, धैर्य, मेधा, स्मृति, साहस और क्षमा—का प्रेरक वर्णन किया और बताया कि यही शक्तियाँ नारी को समाज में विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं।

इसके उपरांत कुटुंब प्रबंधन विषय पर डॉक्टर श्रीमती नीलम गुप्ता ने संबोधित करते हुए कहा कि सुदृढ़ परिवार ही सुदृढ़ समाज की आधारशिला है। उन्होंने संयुक्त परिवार व्यवस्था, आपसी संवाद, जिम्मेदारियों के संतुलन और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया।

इसी क्रम में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसका संचालन श्रीमती अमिता जी ने किया। उपस्थित महिलाओं ने अत्यंत उत्साह से भाग लेते हुए प्रश्नों के उत्तर दिए और अपने ज्ञान व आत्मविश्वास का प्रभावशाली परिचय दिया।

विद्यालय की छात्राओं ने प्रेरणादायी ऐतिहासिक नारियों—झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर, जिजाबाई, पन्नाधाय, रानी दुर्गावती, सोफिया कुरैशी और रानी पद्मावती—के रूपों का जीवंत मंचन प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने वीरांगनाओं के साहस, त्याग और मातृ शक्ति के अद्वितीय स्वरूप को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों के सामने रखा।

महिला सशक्तिकरण एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीमती बिंदु सक्सेना ने कहा कि शिक्षित, संस्कारित और आत्मनिर्भर महिला समाज में परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने महिलाओं को सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहने का आह्वान भी किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित भी किया गया। विशेष रूप से शहीद हेमवीर की धर्मपत्नी श्रीमती राखी सिंह को ‘वीर मातृ शक्ति सम्मान’ प्रदान किया गया। परिवार को एकसूत्र में बांधने और संयुक्त परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाने हेतु श्रीमती शकुंतला देवी को ‘संयुक्त परिवार आदर्श सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रीमती दया अग्रवाल ने कहा कि मातृ शक्ति के जागरण से ही परिवार, समाज और राष्ट्र सशक्त बनते हैं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से अनुरोध किया कि वे अपनी शक्ति, क्षमता और सक्षम नेतृत्व को परिवार एवं समाज के उत्थान में निरंतर लगाए रखें।
अंत में सभी उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि वे परिवार को एकजुट रखते हुए अपनी नारी शक्ति का सकारात्मक रूप से प्रदर्शन करेंगे और समाज में सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने में योगदान देंगे।