#पेरिस पैरालंपिक: बचपन से ही प्रीति के पैर थे कमजोर, मगर इरादा था मजबूत, तभी बनी पदक विजेता#

मेरठ के नजदीक स्थित रामराज के हाशिमपुर गांव निवासी पैरा एथलीट प्रीतिपाल के पेरिस पैरालंपिक में 100 मीटर टी 35 श्रेणी में कांस्य पदक जीतकर पूरे देश का नाम रोशन किया है। अब वह 200 मीटर दौड़ इवेंट में प्रतिभाग करेंगी। उन्होंने अपनी 100 मीटर दौड़ 14.21 सेकेंड में पूरी की और तीसरा स्थान प्राप्त किया। ओलंपिक में पदक लाने के लिए प्रीति कड़ी मेहनत कर रही थीं। अभी तक पिछले कुछ दिनों में हुई प्रतियोगिताओं में उन्होंने कई पदक हासिल किए हैं।

इस वर्ष जापान में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता था। ओलंपिक को लेकर वह दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में तैयारी में जुटी थीं और प्रतिदिन 6 से 8 घंटे तैयारी कर रही थीं। उन्होंने यहां मेरठ में भी 6 साल तक रहकर तैयारी की है। वह यहां किराए पर कमरा लेकर रहती थी।

बचपन से ही पैर थे कमजोर, मगर नहीं मानी हार
प्रीति का जन्म साल 2000 में हुआ था। पैदा होने के छह दिन बाद ही कमजोर पैर के कारण उस पर प्लास्टर लगाया गया था। महज 5 साल की उम्र में वह कैलिपर्स पहनती थीं। अगले 8 साल तक उनका जीवन ऐसा ही रहा। उनके पिता अनिल कुमार डेयरी चलाते हैं। पैरालंपिक खेलों में T35 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिन्हें हाइपरटोनिया, अटैक्सिया, एथेटोसिस और सेरेब्रल पाल्सी जैसे समन्वय संबंधी विकार हैं। 17 साल की उम्र में उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पैरालंपिक खेलों के बारे में पता चला। वह यह सपना पूरा करने के लिए पहले मेरठ और उसके बाद दिल्ली आ गईं। यहां पैरा एथलीट फातिमा खातून की मदद से प्रीति ने 100 और 200 मीटर के इवेंट में हिस्सा लेना शुरू किया। बाद में वह कोच गजेंद्र सिंह के साथ ट्रेनिंग करने साई के जेएलएन स्टेडियम में पहुंची। उन्होंने यहां अपने प्रदर्शन में काफी सुधार किया।

बचपन में हो गई थी सेरेब्रल पाल्सी बीमारी
प्रीति पाल को बचपन में सेरेब्रल पाल्सी नाम की बीमारी हुई थी। उनके पिता अनिल ने उनका यहां उपचार भी कराया, लेकिन उचित इलाज नहीं हो सका। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बड़े होने पर उन्होंने एथलेटिक्स में जाने का सोचा और कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में अभ्यास करना शुरू किया। मेरठ के कसेरूखेड़ा में बेटी को तैयारी कराने के लिए उनके पिता ने कमरा किराए पर लिया। पिछले वर्ष हुए पैरा एशियन गेम्स में भी उन्होंने प्रतिभाग किया और चौथे नंबर पर रहीं।

नेशनल प्रतियोगिताओं में प्राप्त किए 6 स्वर्ण पदक
प्रीति ने 2023 में तीन नेशनल प्रतियोगिताओं में 6 स्वर्ण पदक प्राप्त किए। उन्होंने पहली बार हुए खेलो इंडिया नेशनल गेम्स में 100 मीटर और 200 मीटर में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। बंगलूरु में हुई ओपन नेशनल चैंपियनशिप में 100 मीटर और 200 मीटर में उन्होंने 2 स्वर्ण पदक प्राप्त किए। गोवा में हुए नेशनल गेम्स में भी 100 मीटर और 200 मीटर में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। अभी पिछले दिनों जापान में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने 100 और 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक प्राप्त किया।

प्रीति ने पैरा ओलंपिक में जाने से पहले अपने पिता अनिल, मां बालेश देवी और अपने कोच गजेंद्र को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने अपने यहां तक पहुंचने का श्रेया पैरा एथलीट फातिमा को भी दिया। वहीं जिला पैरा स्पोर्ट्स ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी गुप्ता ने भी उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी योगेंद्र पाल सिंह और प्रीति के शुरुआती दिनों में कोच रहे गौरव त्यागी ने भी उन्हें बधाई दी।