#आजमगढ़ : बीईओ पर घूस मांगने के आरोपों ने पकड़ा तूल#


नोटरी और प्रमाणपत्र पर उठे सवाल, कई सवालों को जन्म दे रहा मामला

मान्यता प्रक्रिया और पूर्व स्वीकृतियों की जांच की मांग
आजमगढ़। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में मान्यता संबंधी कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और घूसखोरी के आरोपों का मामला लगातार गहराता जा रहा है। मान्यता संबंधी कार्य में 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए आकाश यादव के पकड़े जाने तथा धर्मेंद्र राय उर्फ बब्लू राय के नामजद होने के बाद अब किड्स किंगडम विद्यालय, भरौली-अजमतगढ़ के प्रबंधक चन्द्रशेखर शर्मा ने खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अजमतगढ़ कुलदीप नारायण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि विद्यालय की मान्यता संबंधी रिपोर्ट लगाने के नाम पर उनसे एक लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसके ऑडियो और वीडियो साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। चन्द्रशेखर शर्मा के अनुसार, उन्होंने यह ऑडियो-वीडियो विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों को उपलब्ध कराए हैं और इनमें दर्ज सभी तथ्य सत्य हैं। उनका आरोप है कि जब खंड शिक्षा अधिकारी को इस बात की जानकारी हुई कि उनके खिलाफ ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, तो उन्होंने तत्काल विद्यालय की मान्यता संबंधी फाइलों को आगे बढ़ा दिया और साथ ही इन साक्ष्यों को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए। उन्होंने कहा कि विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए उन्हें लगा कि मामले को सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि कथित रूप से धन उगाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके। मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद बीएसए राजीव पाठक ने संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। चन्द्रशेखर शर्मा का आरोप है कि नोटिस जारी होने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय उन पर दबाव बनाने की कोशिशें शुरू हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्तियों के माध्यम से उन्हें धमकाया गया तथा कुछ लोगों की मिलीभगत से कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे चन्द्रशेखर शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें लगातार धमकियां दिलाई जा रही हैं और विभिन्न प्रकार के दबाव बनाकर शिकायत वापस लेने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब सोशल मीडिया पर कुछ दस्तावेज प्रसारित किए गए। इनमें 13 अप्रैल 2026 की एक नोटरी शपथपत्र शामिल है, जिसमें कथित तौर पर यह उल्लेख है कि खंड शिक्षा अधिकारी कुलदीप नारायण सिंह ने कभी मान्यता या अन्य किसी कार्य के लिए धन अथवा किसी प्रकार की मांग नहीं की तथा उनके खिलाफ कोई शिकायत या वीडियो पूर्णतः गलत है। इसके अतिरिक्त 21 जनवरी 2026 का एक हस्तलिखित प्रमाणपत्र भी सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिसमें कथित रूप से चन्द्रशेखर शर्मा द्वारा यह प्रमाणित किया गया है कि कुलदीप नारायण सिंह ने विद्यालय की मान्यता के लिए कभी धन नहीं मांगा, न ही उन्हें परेशान किया और उनके खिलाफ किसी मंच पर कोई शिकायत नहीं की गई। हालांकि चन्द्रशेखर शर्मा ने इन दस्तावेजों को जाली और कूटरचित बताते हुए कहा है कि इन्हें दबाव बनाने और सच्चाई को दबाने के उद्देश्य से तैयार कराया गया है। पूरा मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि कथित रूप से कोई विवाद या शिकायत थी ही नहीं, तो छह महीने पहले प्रमाणपत्र और दो महीने पहले नोटरी शपथपत्र तैयार कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? वहीं दूसरी ओर यदि प्रबंधक के आरोप सही हैं तो फिर यह भी जांच का विषय है कि मान्यता संबंधी अभिलेख किस परिस्थिति में आगे बढ़ाए गए। मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या विद्यालय की मान्यता के लिए सभी निर्धारित मानक पूरे थे? यदि नहीं, तो फाइल आगे कैसे बढ़ी? वहीं यदि सभी मानक पूरे थे तो फिर कथित रूप से धन की मांग क्यों की गई? इन सभी बिंदुओं की जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है। चन्द्रशेखर शर्मा का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने मांग की है कि खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यकाल में दी गई विभिन्न विद्यालयों की मान्यताओं की भी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं मान्यता प्रक्रिया में अनियमितताएं तो नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा मीडिया को उपलब्ध कराए गए ऑडियो-वीडियो वास्तविक हैं और उनमें लगाए गए सभी आरोप सत्य हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें धमकाने के साथ-साथ उनके खिलाफ जाली दस्तावेज भी तैयार किए गए हैं। इसी को लेकर उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है