


नशे में तेज रफ्तार और लापरवाही बनी हादसों की बड़ी वजह, दोपहिया दुर्घटनाएं सबसे ज्यादा

लखनऊ। रंगों के त्योहार होली पर उत्तर प्रदेश की सड़कों पर मौत का तांडव देखने को मिला। प्रदेश भर में बीते 48 घंटों के दौरान हुए भीषण सड़क हादसों में 265 लोगों की असमय मौत हो गई, जबकि 650 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसों के बाद प्रदेश के कई अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड घायलों से पटे पड़े हैं। पुलिस और परिवहन विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश हादसों की मुख्य वजह शराब के नशे में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना रही। राजधानी लखनऊ और इसके आसपास के जिलों में हादसों ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया, जहां कुल 64 लोगों की जान चली गई। लखनऊ और सीतापुर में 9-9 लोगों की मौत हुई, जबकि बहराइच और बाराबंकी में 8-8 लोगों ने दम तोड़ा। अमेठी में 7, गोंडा में 6, रायबरेली में 7 और सुलतानपुर, श्रावस्ती व अंबेडकरनगर जैसे जिलों में भी कई परिवारों के चिराग बुझ गए। अधिकांश दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों की भिड़ंत या अनियंत्रित होकर पेड़ और खंभों से टकराने के कारण हुईं। पूर्वांचल के गोरखपुर क्षेत्र में भी होली का जश्न मातम में बदल गया, जहां कुल 38 लोगों की मौत हुई। इनमें अकेले गोरखपुर जिले में 11 लोगों की जान गई। देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में भी मौतों का आंकड़ा चिंताजनक रहा। वहीं, कानपुर और आसपास के जिलों में करीब 40 लोगों की मौत की खबर है। कानपुर मंडल के हरदोई जिले में सर्वाधिक 8 लोगों की जान गई, जबकि फर्रुखाबाद, इटावा और औरैया में भी कई हादसे हुए। प्रयागराज और वाराणसी समेत पूर्वांचल के 10 जिलों में भी 37 से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई। ब्रज क्षेत्र के आगरा, एटा, मथुरा और मैनपुरी में 19 लोगों की जान गई, जिनमें एटा में सर्वाधिक 8 मौतें हुईं। अलीगढ़ और हाथरस क्षेत्र में 14 लोगों की जान चली गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर में भी रफ्तार का कहर दिखा, जहां कुल 21 लोगों की मौत हुई। बरेली मंडल और लखीमपुर खीरी में भी 24 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि त्योहार के दौरान बार-बार चेतावनी के बावजूद लोगों ने यातायात नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। बिना हेलमेट, तीन सवारी और शराब के नशे में ड्राइविंग करने के कारण यह भीषण आंकड़े सामने आए हैं। कई जगहों पर देर रात हुई भिड़ंत के कारण घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल सका, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ गया। प्रशासन अब इन हादसों के कारणों की विस्तृत समीक्षा कर रहा है, ताकि भविष्य में त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जा सके।
