#अभिषेक हत्याकांड: 15 दिन और 2,300 किमी का सफर… छह दिन मुरादाबाद में छिपी; एक शहर से दूसरे शहर भागती रही पूजा#

अलीगढ़ के बाइक शोरूम संचालक अभिषेक गुप्ता हत्याकांड में गिरफ्तार पूर्व महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती उर्फ पूजा शकुन पांडेय को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर होने की आस थी। इसी आस में वह 15 दिनों तक 2300 किमी तक भागी। उसने अलीगढ़ में दायर अग्रिम जमानत अर्जी वापस लेकर अगले दिन हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दायर कराई। खुद वह अधिवक्ताओं संग हाईकोर्ट तक गई थी। तय किया था कि अग्रिम जमानत अर्जी पर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद ही सरेंडर पर विचार किया जाएगा। यह तथ्य अब उसके पकड़े जाने के बाद उजागर हो रहे हैं।

खेरेश्वर चौराहे पर अभिषेक की हत्या के बाद उसी रात पुलिस ने नामजद पूजा के पति अशोक पांडेय को दबोच लिया था। उसे 28 सितंबर को जेल भेजा था। फिर प्रयास करते हुए एक अक्तूबर को शूटर फजल व तीन अक्तूबर को शूटर आसिफ को पकड़कर जेल भेजा था।

इन दोनों से पूजा व अशोक द्वारा सुपारी दिया जाना तय होने के बाद पुलिस ने पूजा शकुन का पीछा शुरू किया। तब यह उजागर हुआ कि पूजा घटना वाली रात ही यहां से भाड़े की कार से बुर्का पहनकर गाजियाबाद में यति नरसिंहानंद के डासना आश्रम पहुंची है।

जब पुलिस वहां पहुंची तो पता चला कि 27 सितंबर को तड़के ही उसे यहां से हरिद्वार भेज दिया गया। जब पुलिस हरिद्वार पहुंची तो पता चला कि 28 की शाम को उसे यहां से निकाल दिया गया।

हरिद्वार से 29 सितंबर को मुरादाबाद पहुंची थी पूजा
इसके बाद पुलिस पूरी तरह खाली हाथ थी। मगर तभी पुलिस को सात अक्तूबर को यह खबर मिली कि पूजा शकुन के अधिवक्ता ने सत्र न्यायालय में दायर की अग्रिम जमानत अर्जी नॉट प्रेस यानी बेल दिए जाने से इन्कार के बाद वापस ले ली है। इस प्रक्रिया पर पुलिस का ध्यान गया, तब पुलिस ने करीबियों के नंबरों के जरिये काम शुरू किया तो पता चला कि हरिद्वार से चलकर पूजा 29 सितंबर को मुरादाबाद पहुंची थी। 

वहां छह दिन रुकने के बाद सात अक्तूबर की शाम को प्रयागराज भी गई। वहां उसने अलीगढ़ से वापस कराई अग्रिम जमानत अर्जी हाईकोर्ट में दायर की। इसके बाद वह वापस मुरादाबाद आई। यहां से नौ अक्तूबर को जयपुर रवाना हो गई, मगर जयपुर में रुकने के बजाय उसने वापस आने का मन बना लिया। तभी पुलिस टीम 10 अक्तूबर की दोपहर जयपुर रवाना हो गई। इसके बाद देर शाम पुलिस को सफलता मिल गई।

राह चलते लोगों के मोबाइल से करती थी कॉल
पुलिस जांच के अनुसार, पूजा ने इस बीच अपना नंबर कभी नहीं चलाया। न उसे साथ लेकर गई, मगर पुलिस ने अलीगढ़ व मुरादाबाद के जिन करीबियों के नंबरों का अध्ययन किया।

उस जांच में यही आया कि पूजा ने हमेशा कभी कार चालक, कभी ऑटो चालक तो कभी होटल स्टाफ या किसी सरेराह चलते व्यक्ति का मोबाइल प्रयोग किया। कोई भी व्यक्ति महिला द्वारा परेशानी बताने पर मोबाइल प्रयोग करने दे देता था। बस इसी सहारे पुलिस आगे बढ़ी, जिससे सफलता मिल गई।

अग्रिम जमानत पर निर्णय तक छिपना था
पुलिस जांच में उजागर हुआ कि पूजा शकुन को उसके अधिवक्ताओं ने यह समझा दिया था कि जब तक हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत अर्जी पर निर्णय नहीं हो जाता। तब तक गिरफ्तारी से बचना है। साथ में अलीगढ़ से इतनी दूरी पर रहना है कि जरूरत पड़े तो आसानी से समय पर अलीगढ़ पहुंचा जा सके, इसीलिए पूजा जयपुर से वापस आगरा आ रही थी।

डासना-हरिद्वार के बजाय मुरादाबाद में मिली शरण
पुलिस ने जब पूजा का पीछा शुरू किया तो डासना व हरिद्वार से यही जवाब मिला कि यहां उसे शरण नहीं दी गई है। इसके बाद पुलिस के पास कोई ऐसा लिंक न था, जिससे उसका पीछा किया जा सके।

मगर सात अक्तूबर को अलीगढ़ अदालत की प्रक्रिया के बाद पुलिस को अलीगढ़ व मुरादाबाद के कुछ नंबरों का लिंक मिला। जब उनका अध्ययन किया गया तो पता चला कि उस दिन मुरादाबाद के कुछ अधिवक्ता अलीगढ़ अदालत पहुंचे थे। बस उन नंबरों पर ध्यान देने का काम शुरू हुआ।

तब पता चला कि वहीं अधिवक्ता पूजा को मुरादाबाद से लेकर प्रयागराज गए थे। उनके साथ वह वापस भी मुरादाबाद आई। उन्होंने ही पूजा को मुरादाबाद में किसी घर में ठहरवाया था। वहीं से पूजा को पकड़ने में पुलिस को सफलता मिली। इस बीच हरिद्वार से मुरादाबाद व मुरादाबाद से जयपुर व जयपुर से आगरा के सफर में उसने निजी बस का प्रयोग किया।